पैर के पंजे बताएंगे कितने स्वस्थ हैं आप, बीमारी पर रोक भी लगेगी

Dainik Bhaskar

विशेषज्ञों का मानना है कि पैर के पंजों की दशा हमारे सेहत की जानकारी दे सकती है। आइए जानते हैं कैसे इसे समझकर हम गंभीर बीमारियों के शुरुआती दौर में ही संभल सकते हैं। 

पंजों का ठंडा पड़ना

यह हाईपो-थायरॉइडिज्म का संकेत हो सकता है। यह थायरॉइड ग्रंथि से हॉर्मोन्स के कम उत्पादन की वजह से होता है। वैसे रेनॉउड्ज बीमारी में भी हाथ-पैरों की अंगुलियां तापमान, तनाव, धूम्रपान और दवाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। 
क्या करें:थकान व मांसपेशियों में दर्द भी है तो हाईपोथायरॉइडिज्म की आशंका है, इसलिए डॉक्टर की सलाह लें। अगर बीमारी रेनॉउड्स निकले तो ज्यादा गर्म या ठंडे तापमान से बचें।

अल्सर या अकड़नयह

डायबिटीज की वजह से हो सकता है। पंजों में अकड़न, आस-पास संवेदना का कम होना और लाल रंग के अल्सर्स का ठीक न होना टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण हैं। वहीं अंगुलियों में अकड़न और झुनझुनी त्वचा के ठीक नीचे की रक्त नलिकाओं के क्षतिग्रस्त होने के संकेत हैं। 

क्या करें: अगर पंजों के इन लक्षणों के साथ बार-बार प्यास लगना, थकान महसूस होना और वजन घटना भी दिखाई दे तो जल्द से जल्द अपने डॉक्टर को दिखाएं।

नाखूनों के आकार और रंग में बदलाव

नाखूनों के आकार में परिवर्तन रक्त में ऑक्सीजन की कमी से होता है। मगर ये लक्षण फेफड़ों, हृदय या पेट से जुड़ी अनियमितता की ओर भी इशार करते हैं। यदि रंग में बदलाव दिख रहा है तो यह एक प्रकार का चर्म रोग सोरायसिस हो सकता है।

क्या करें: हृदय से जुड़े लक्षण गंभीर हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेकर जांच करवा लेनी चाहिए। सोरायसिस हो तो लाइट थैरेपी या दवाएं ली जा सकती हैं। 

उंगुलियों से बाल गायब होना

ऐसा तब होता है, जब हृदय रक्त को पैरों की उंगुलियों तक ठीक से पंप नहीं कर पाता। इससे उस हिस्से में बाल भी नहीं उग पाते। इस स्थिति में पंजे सफेद, लाल या बैगनी भी दिखाई देने लगते हैं। यह ब्लड सर्कुलेशन या नसों से संबंधित बीमारी हो सकती है।

क्या करें: इन लक्षणों के अलावा चलने या सीढ़ियां चढ़ने में भी दर्द हो तो डॉक्टर के पास जाना जरूरी है। वे आपको ब्लड सर्कुलेशन और कोलेस्ट्रॉल मेंटेन करने की दवाएं देंगे। 
 

पंजों के जोड़ों में दर्द

यह रूमेटॉइड अर्थाइटिस यानी संधिवात गठिया रोग भी हो सकता है। हाथ-पैरों के छोटे-छोटे जोड़ इस रोग में सबसे पहले प्रभावित होते हैं। जहां अन्य तरह के गठिया रोग में सुबह के समय ज्यादा दर्द होता है, वहीं रूमेटॉइड अर्थाइटिस में दर्द लगातार कई घंटे हो सकता है।

क्या करें: जोड़ों में सूजन और छूने पर दर्द भी है तो डॉक्टर को दिखाने में बिल्कुल देरी न करें। प्राथमिक तौर पर इस रोग में दर्द से राहत देने वाली दवाइयां दी जाती हैं।

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